माहवारी का न आना

एक लड़की जब13-14 वर्ष की हो जाती है है तो उसे माहवारी होने लगती है वो किशोरावस्था की और बढ़ने लागित है उसमे हॉर्मोन में बदलाव होने के कारण उसके शरीर में बदलाव, बालो का आना कुछ खास जगहों पर, आवाज़ में बदलाव, स्तनों का बढ़ना आदि बदलाव आने लगते है

एक सामान्य मासिक चक्र 28 दिन का होता है कभी-कभी ये दिन 18-25 का भी हो जाता है नहीं है कभी=कभी ये असामन्य हो जाता है पर जैसे-जैसे चक्र नियमित होता है सब ठीक हो जाता है

इस भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं न वक़्त पर खाती हैं, ना सोती हैं और न ही खुद की सेहत का ख्याल रख पाती हैं। आज के ज़माने में महिलाओं की स्थिति अधिक विचारणीय है क्योंकि उन्हें घर-बाहर दोनों तरफ संतुलन बनाकर चलना होता है। ऐसे में महिलाओं में तनाव का स्तर अधिक रहता है और अंतत: वह समझौता करती हैं अपनी सेहत से।

माहवारी न आने के कारण-

एक प्रमुख कारण यही देखा गया है. शरीर में खून की कमी होना या मैथुन दोष होना या फिर कभी कभी कुछ महिलाएं या युवतियां महावारी के समय ज्यादा ठंडी चीजों का सेवन कर लेती हैं. या फिर ठंड लग जाती है. इसकी वजह से भी मासिक धर्म रुक सकता है. और पानी में काफी देर तक भीगना भी इसका एक कारण हो सकता है.

ज़्यादा वज़न होना - अत्यधिक मोटे होने से भी महीने पर असर पड़ता है क्युकी इस कारण हॉर्मोन ठीक से काम नहीं कर पाते और फलस्वरप महीना कम या सही से नहीं हो पाता

वज़न का घटना - ज़रूरी नहीं की अत्यधिक मोटे हो तो तभी ये समस्या हो अत्यधिक दुबले होने से भी ये समस्या सामने आती है दुबले शरीर के कारण इस्ट्रोजन सही से नहीं बन पाता और ओवुलेशन भी नहीं हो पाता

  • गर्भनिरोधक गोलिया लेने से भी महीने पर बहुत गहरा असर पड़ता है
  • थाइरोइड की समस्या- थाइरोइड का बढ़ना और घटना दोनों माहवारी को प्रभावित करते है
  • PCOS/PCOD - कई बार शरीर को अनदेखा करने से विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा होती है जिनमें से एक है PCOD/PCOS बीमारी। इस समस्या से पीड़ित महिलाओं में और भी अनेक बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। यह रोग महिलाओं एवं लड़कियों में होना आजकल आम बात हो गई है। कुछ सालों पहले तक यह समस्या 30-35 उम्र की महिलाओं में अधिक पाई जाती थी पर अब स्कूल जा रही बच्चियों में भी यह समस्या आम हो गई है पॉली सिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर' या 'पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम'। इसमें महिला के गर्भाशय में मेल हार्मोन androgen का स्तर बढ़ जाता है परिणामस्वरूप ओवरी में सिस्ट्स बनने लगते हैं।

  • मानसिक तौर पर परेशान या चिंता होने से भी होर्मोनेस पर गहरा असर पड़ता है
  • नियमितता में बदलाव के कारण-काम काजी महिलाओ में अक्सर ये समस्या आ जाती है
  • स्तनपान कराने से भी ये समस्या हो जाती है, ज़्यादा स्तनपान कराती है कुछ महिलाए पर जैसे ही वो स्तनपान करना बंद करती है समस्या ठीक हो जाती है
  • अधिक कसरत करने से-ज़्यादा तर जो खिलाड़ी है या एथलीट है उनमे भी ये समस्या हो जाती है
  • दवाइयों का अधिक सेवन करने से
  • सफर करने से- सही से नींद और खान-पान नहीं हो पाता मानसिक तौर पर होर्मोनेस में असर पड़ता है और ये समस्या सामने आ जाती है आराम करने, और खान-पान का ध्यान रखने से जल्द आराम मिल जाता है
  • और अन्य कारण- गर्भाशय में कोई परेशानी, लिवर की कोई समस्या, मधुमेह, TB, IBS (IRRITABLE BOWEL SYNDROME)
  • हो सकता है कोई खुश खबरी भी हो तो प्रेग्नन्सी टेस्ट करवाए

    कभी-कभी युक्तियों को दस्त भी हो जाते हैं. रात को ठीक तरह से नींद नहीं आती. और पेट दर्द बना रहता .है और शरीर में जगह जगह सूजन जैसी आ जाती .है काफी मानसिक तनाव बढ़ जाता है. और हाथ पैर टूटने लगते हैं. विशेषकर कमर में दर्द रहता है. गले में खराश और आपका पूरा शरीर बेहद थका हुआ महसूस होने लगता है

    पपीते के द्वारा मासिक धर्म का उपचार - महावारी चालू करने के लिए आप रोजाना कच्चे पपीते का सेवन कर सकते हैं या फिर पपीते की सब्जी बनाकर भी कुछ दिनों तक खाने से आपका रुक हुआ मासिक धर्म खुलकर आने लगता है.

    खानपान का विशेष ध्यान रखे
    दालचीनी खाने से भी महीना आ जाता है
    गुड़ खाने से भी आराम मिलता है क्युकी गुड़ में आयरन होता है और वो खून की कमी को दूर करता है

    होमियोपथिक उपचार- ‘’AMENOCIN DROPS’’ लेने से माहवारी आने लगती है
    लक्ष्णों के आधार पर दवाई आप हमारे ‘’ASK YOUR DOCTOR’’ से पूछ सकते है